प. पू. आचार्य श्री जनार्दन महाराज की वेबसाइट पर आपका सहर्ष स्वागत है
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आईए! श्री सत्पंथ मंदिर, संतकृपा आश्रम फैजपुर के इस पवित्र प्रांगणमें आपका मन:पूर्वक स्वागत है | आज हम जानना चाहेंगे 'सत्पंथ' क्या है? क्या है मुल विचारधारा सत्पंथकी? कौन है आराध्य दैवत? कितने धाम है? शाखाए कहा है? एवं फैजपुर विद्यमान मंदिर का निर्माण और गादीपतियोंकी जानकारी प्राप्त करे |

सूरज, चन्द्रमा, तारे, गृह, नक्षत्र एवं पृथ्वी का भी नाही था आस्तित्व | एक अविनाशी सत-चित आनंद स्वरुप ध्यानमें लीं अनंत चैतन्य स्वरुप प्रकश छाया था | अनादी प्रकृति, सत्वरजात्मक मायाशक्ति निर्माण से पंच महाभूतो, पंचप्राणों, पंचज्ञानेन्द्रियो, पंचकर्मेन्द्रियो प्रक्रुतियोंका उगम हुआ और निर्माण हुआ समष्टि, याने सृष्टि और व्यष्टि याने प्राणपिंड का | यही है सूक्ष्म सत आत्मा स्थूल जगत का सत्य आधार | और यही अविनाशी अमर सत तत्वोंको जाननेका एवं आचरण करने का मार्ग है "सत्पंथ" |

यही सिद्धांतोका ध्यान-अनुभव, अनुकरण किया सदगुरु इमामशाह महाराजजीने | प्राचीन ऋषि-मुनियोंने सिध्धांतो का तत्व प्राप्त कर कर, अनुभव का आधार एवं अनुकरण की प्रयाससे ही अंत:करण से प्रेरण पाई और मानव जीवन सुख-समृद्धमय करने एवं देहमुक्ति का मूलमंत्र जाना और सत्पंथ की स्थापना की | अधिक जानकारी आप तत्त्वज्ञान पेग पर प्राप्त कर सकते है | मानव कल्याण का मूल उद्देश लेकर श्री सत् पंथ संस्थान, फैजपुर का निर्माण १५९८ में हुआ | परम पूज्य सदगुरुवर्य श्री. इमामशहा महाराज द्वारा मानव कल्याण के लिए स्थापित किये गए सत् पंथ धर्मं का प्रचार-प्रसार १४४० से लेकर अबतक चल रहा है | पहले गादीपति आचार्य श्री धर्मदासजी महाराज को लेकर अबतक के गादीपति प.पू. आचार्य श्री जनार्दन महाराज तक १२ गादीपतियोने सत् पंथ धर्मंद्वारा मानव कल्याण का ईश्वर कार्य निरंतर शुरू रखा है |

ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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